Semiconductor और Doping क्या होता है? What is Semiconductor and Doping?

 तो दोस्तों आज की Blog post में हम जानेंगे कि semiconductor क्या होता हैं, और इसकी क्या quality होती हैं, वैसे तो प्रकृति में बहुत से पदार्थ पाए जाते जिनमे से कुछ अपने अन्दर electric current को बहने देते हैं और कुछ नहीं और इसी के आधार पर materials को तीन तरह कि category में बाँटा जाता है. 

                                

 जैसा कि टोटल पदार्थ अब तक इस प्रकृति में लगभग 105 से ऊपर है उन्ही में से ही कुछ metal होते हैं और कुछ non metal और कुछ semiconductor होते हैं?
वैसे तो जो पदार्थ जो अपने अन्दर current को flow होने देते वो कहलाते हैं metals यानि Conductors और जो पदार्थ अपने अन्दर current को flow नही होने देते वो कहलाते हैं non metals यानि Insulator और कुछ अलग प्रकार के पदार्थ होते हैं जो अपने अन्दर current को flow होने भी देते हैं और नही भी क्या ? जी हाँ, और इस तरह के पदार्थ कहलाते हैं अर्थचालक (Semiconductor).    

वैसे तो जो पदार्थ जो अपने अन्दर current को flow होने देते वो कहलाते हैं metals यानि Conductors और जो पदार्थ अपने अन्दर current को flow नही होने देते वो कहलाते हैं non metals यानि Insulator और कुछ अलग प्रकार के पदार्थ होते हैं जो अपने अन्दर current को flow होने भी देते हैं और नही भी क्या ? जी हाँ, और इस तरह के पदार्थ कहलाते हैं अर्थचालक (Semiconductor).    


वैसे तो जो पदार्थ जो अपने अन्दर current को flow होने देते वो कहलाते हैं metals यानि Conductors और जो पदार्थ अपने अन्दर current को flow नही होने देते वो कहलाते हैं non metals यानि Insulator और कुछ अलग प्रकार के पदार्थ होते हैं जो अपने अन्दर current को flow होने भी देते हैं और नही भी क्या ? जी हाँ, और इस तरह के पदार्थ कहलाते हैं अर्थचालक (Semiconductor).    


वैसे तो जो पदार्थ जो अपने अन्दर current को flow होने देते वो कहलाते हैं metals यानि Conductors और जो पदार्थ अपने अन्दर current को flow नही होने देते वो कहलाते हैं non metals यानि Insulator और कुछ अलग प्रकार के पदार्थ होते हैं जो अपने अन्दर current को flow होने भी देते हैं और नही भी क्या ? जी हाँ, और इस तरह के पदार्थ कहलाते हैं अर्थचालक (Semiconductor).    


 Semiconductor ( अर्थचालक ) क्या है ?



Semiconductor ऐसे पदार्थ (material) होते जो अपने अन्दर electric current को flow भी होने देते हैं और नही भी क्या ? जी हाँ, तो जैसा कि हमें नाम से ही पता चलता है Semi मतलब आधा यानि आधा conductor और आधा Insulator, Semiconductor ऐसा material होता जिसकी resistivity metals और non metals के बीच होती है?
Semiconductor में कौन-कौन से पदार्थ ( Element) आते हैं तो इसमें हमारे Silicon, Germenium, Cadminium sulphide और Gallium Arcenide आदि आते हैं ?


Semiconductor की Properties 


 तो semiconductor की property ये होती है कि अगर temperature ज्यादा होता है तो semiconductor अपने अन्दर से current flow होने देता है और अगर temperature कम होता है तो semiconductor अपने अन्दर से  current flow नही होने देता है,

 जब temperature बढ़ता है तब semiconductor के electrons उसके valance band से conduction band के अन्दर transfer हो जाते हैं तो इस तरह से एक normal semiconductor काम करता है?

अब मान लो कि इस pure semiconductor से मैंने कोई भी component बना दिया तो अब यहाँ पर मुझे wait करना होगा कि कब temperature बढ़े और कब में इस component को use करूँ तो यहाँ पर काफी problem होने लगी थी और इसी problem से बचने के लिए हम यहाँ पर काम में लेते हैं Doping process को Doping process के अन्दर हम क्या करते हैं कि ये जो pure semiconductor हैं इसके अन्दर हम कुछ changes कर देते हैं और फिर ये semiconductor हमारा normal temperature पर भी current को conduct होने देता है ?

Electron Gain or lose ?

तो मैंने अपने पिछले ब्लॉग post यानि metals वाली post में electron gain और lose का rule बताया था चलये उसको दुबारा देख लेते हैं

तो जैसा कि हम जानते ही हैं कि किसी भी Atom के first orbit के बाद वाले orbits  में minimum 8 electrons तो होने ही चाहिए उसको balance होने के लिए 
अगर electrons 8 से कम हैं तो कुछ-न-कुछ गड़बड़ है 


                  

                      तो किसी Element के Atom के last orbit में 4 electrons से कम हैं तो वो Atom अपने उन electrons को lose कर देगा  
और अगर किसी Element के Atom के last orbit में 4 electrons से ज्यादा हैं तो वो Atom किसी और Atom से electrons gain कर लेगा 
ये कुछ 2 rule जिससे ये decide होता है element metal होगा या non -metal .  
और एक तीसरा rule भी होता है जिसमे अगर किसी Atom के last orbit में सिर्फ 4 electrons ही हो तब क्या होगा और इस condition में ये Atom न तो electrons को gain करेगा और न ही lose करेगा और इस तरह के elements ही semiconductor की category में आते हैं ?



                              Metals and Non-Metals क्या हैं ?


Nature of Silicon     

तो चलये अब Silicon का उदहारण ले ही लेते हैं कि ये क्या करेगा ये electrons को lose करेगा या gain करेगा या ऐसे ही रहने देगा चलये देखते हैं ?

                                                   

                                                 

तो Silicon का Atomic no. होता है 14, तो अभी Silicon के पास हैं 14 electrons तो first orbit में आए 2 electrons और second orbit में आए 8 electrons तो बचे अब 4 electrons लेकिन orbit को पूरा करने के लिए चाहिए 8 electrons लेकिन हैं इसके पास only 4 electrons तो अब क्या? तो अब इसको ज़रोरत है 4 electrons की तो अब यहाँ पर ये क्या करेगा ये कुछ-भी नही करेगा न ही ये electron को lose करेगा और न ही gain करेगा ?


                                                     

                


तो इस तरह के Elements जो Atom के electrons को न तो lose करते हैं और न ही gain करते हैं वो कहलाते हैं हमारे Semiconductor?


 Semiconductor ( अर्थचालक ) के types ?

तो simply semiconductor 2 तरह के होते हैं: 

1 ) Intrinsic semiconductor 
2 ) Extrinsic semiconductor
 

1 ) Intrinsic semiconductor : वो semiconductor जो naturally पाए जाते हैं यानि pure semiconductor ?
2 ) Extrinsic semiconductor : pure semiconductor के अन्दर कुछ Doping करने के बाद जो semiconductor बनता है वो होता है Extrinsic semiconductor. Extrinsic semiconductor को हम impure semiconductor भी कहते है?
  Extrinsic semiconductor भी 2 तरह के होते हैं ?

a) p – type semiconductor : जब pure semiconductor में हम trivalent type impurity को add करते हैं यानि ऐसे पदार्थ ( element ) के साथ जिसके last orbit में only 3 valance electron ही हों तब जो semiconductor बनता है वो बनता है p – type semiconductor.
b) n – type semiconductor : जब pure semiconductor में हम pentavalent type impurity को add करते हैं यानि ऐसे पदार्थ ( element ) के साथ जिसके last orbit में only 5  valance electron हों तब जो semiconductor बनता है वो बनता है n – type semiconductor.


 Doping क्या होता है ?

तो Doping का मतलब होता है कि किसी भी चीज़ में कुछ Impurity मिलाकर उस चीज़ कि छमता को बढ़ा देना तो अब मान लीजिये कि एक इन्सान है उसकी capacity है 20 kg weight उठाने की लेकिन अगर मैं उस इन्सान को कुछ tablet या injection दे दूं जिससे अब उसकी capacity 40 kg weight उठाने की हो जाये तो इस चीज़ को कहा जाता है Doping. 
तो हम ये Doping process Semiconductor के अन्दर करते हैं जिससे उसकी properties में कुछ change आ जाये ?
वैसे तो जो pure semiconductor जो होता है वो normal temperature पर current को flow नही होने देता लेकिन यहाँ पर इसी pure semiconductor को normal temperature पर भी current को flow होने वाला semiconductor बनाने योग्य हम doping को काम में लेते हैं ?
तो doping में हम एक pure semiconductor ( Intrinsic semiconductor ) को impure semiconductor ( Extrinsic semiconductor ) बनाते और इसको बनाने के लिए हम pure semiconductor में कुछ other types के metals का use करते हैं वो metal होते हैं अगर हमें p – type semiconductor बनाना है तो हम इसमें ऐसा पदार्थ के साथ इसको मिलायेंगे जिसके Atom के last orbit में 3 valance electron आते हों जैसे की Boron, Aluminium आदि ?
                                                            





इसी तरह अगर हमें n – type semiconductor बनाना है तो हम इसमें ऐसा पदार्थ के साथ इसको मिलायेंगे जिसके Atom के last orbit में 5 valance electron आते हों जैसे की Antimony आदि ?


  Trivalent element क्या है ?  P – Type semiconductor ?


Trivalent element वो element होते हैं जिनके Atom के last orbit में 3 valance electron होते हैं जैसे कि Boron या Aluminium आदि तो जैसा कि normally silicon के last orbit में 4 valance electron पाए जाते है जिसके कारण ये electrons को न ही gain करता हैं और न ही lose करता है तो इसीलिए हम इसकी bonding trivalent element के साथ करवाते हैं?
और जब भी हम इसकी bonding trivalent element के साथ करवाते हैं जैसा कि आप निचे diagram में देख सकते हैं कि silicon के पास हैं 4 valance electron और boron हैं उसके पास हैं 3 electron तो दोनों कि bonding होने के बाद अब हो गए टोटल 7 electron लेकिन किसी भी Atom का एक rule होता है कि उसके first orbit के बाद वाले हर orbits में minimum 8 electron तो होने ही चाहिए उसको balance रहने के लिए लेकिन यहाँ पर bonding के बाद हो रहे हैं 7 electrons यानि 1 electron कम है 
और इसी 1 electron को कम होने को हम बोलते हैं “Hole” यहाँ पर Hole का मतलब होता है Deficiency of electron यानि 1 electron कि जगह खाली है इसमें एक electron समा सकता है ?
तो इसी तरह से हम p – type semiconductor बनाते हैं ? 

                        

Pentavalent Element क्या है ?  N – type semiconductor ?


Pentavalent element वो element होते हैं जिनके Atom के last orbit में 5 valance electron होते हैं जैसे कि Antimony आदि तो जैसा कि normally silicon के last orbit में 4 valance electron पाए जाते है जिसके कारण ये electrons को न ही gain करता हैं और न ही lose करता है तो इसीलिए n -type semiconductor बनाने के लिए हम इसकी bonding pentavalent element के साथ करवाते हैं?
और जब भी हम इसकी bonding pentavalent element के साथ करवाते हैं जैसा कि आप निचे diagram में देख सकते हैं कि silicon के पास हैं 4 valance electron और Antimony हैं उसके पास हैं 5 electrons तो दोनों कि bonding होने के बाद अब हो गए टोटल 9 electron लेकिन किसी भी Atom का एक rule होता है कि उसके first orbit के बाद वाले हर orbits में minimum 8 electron तो होने ही चाहिए उसको balance रहने के लिए लेकिन यहाँ पर bonding के बाद हो रहे हैं 9 electrons यानि 1 electron ज्यादा  है 
और इसी 1 electron को ज्यादा  होने को हम बोलते हैं “free electron ” यहाँ पर “free electron” का मतलब होता है कि 1 electron ज्यादा है और वह इधर- उधर ऐसे ही randomly move हो रहा है उसे कही भी जगह नही मिल रही है ?
तो इसी तरह से हम n  – type semiconductor बनाते हैं ?
                    

                                                     

         

तो इसी तरह से हम इस Extrinsic semiconductor का काफी फायेदा उठाते है इससे हम diode, Transistor, IC 
और computer ले microprocessor आदि काफी सारी devices बनाते हैं ? 


Diode क्या है ?


Diode एक ऐसा semiconductor device होता जो current को एक direction में ले जाने का काम करता है और इसीलिए हम इसका बहुत फाएदा उठाते हैं आजकल के rectifiers में जिसमे हम AC current को DC current में convert करते हैं ?
Diode बना होता है एक p – type semiconductor और एक n – type semiconductor से जिसमे इन दोनों semiconductors को आपस में जोड़ रखा होता है और Diode को बना देते हैं ??


तो हम आशा करते हैं कि हमारे द्वारा Semiconductor के बारे में दी गई जानकारी आपको पसंद आई होगी अगर आपको यह Blog Post आई तो आप इसको like करिए और आप हमारे youtube channel पर जाना चाहते हैं तो निचे दिए गए link पर आप click करिए हमारे youtube channel पर भी आपको इसी तरह कि Informative Videos मिल जायेंगे इस Blog Post को पढने के लिए आपका बहुत-बहुत धन्यवाद!!



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